उत्तराखंड : सफाई के मामले में दावे बड़े, हकीकत अलग

देहरादून । स्वच्छता के मामले में भले ही उत्तराखंड को छह अवार्ड मिले हों, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड के शहरों का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। देहरादून और काशीपुर को छोड़कर बाकी शहरों के हालात काफी खराब हैं। काशीपुर की रैंकिंग भी पिछले साल की 339 के मुकाबले इस साल सुधरकर 304 पर आई है। रुड़की की रैंक पिछले साल 100 थी, जो गिरकर 134 पर पहुंच गई है। हल्द्वानी की रैंक पिछले साल 279 थी, गिरकर 282 पर आ गई है। रुद्रपुर की रैंक पिछले साल 255 थी, इस साल गिरकर 277 पर आ गई। हरिद्वार की रैंक पिछले साल 279 से गिरकर 330 पर आ गई।

स्वच्छता के मामले में वैसे तो उत्तराखंड के दावे बड़े-बड़े हैं। छह अवार्ड मिलने की खुशी भी है, लेकिन हकीकत अलग है। आज तक प्रदेश के निगमों में 100 फीसदी डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं हो पाई। हर महीने निकलने वाले लाखों टन प्लास्टिक वेस्ट के निपटारे के लिए एक अदद वेस्ट टू एनर्जी प्लांट या अन्य कोई समाधान नहीं हो पाया। कई शहरों में कूड़े के ढेर बढ़ते जा रहे हैं। सॉलिड वेस्ट के निस्तारण की योजनाएं केवल कागजों में ही हैं।

हरिद्वार को गंगा घाटों की सफाई पर मिला पुरस्कार
सरकार ने गंगा टाउन की जो श्रेणी बनाई थी, उसमें गंगा घाटों की सफाई को आधार बनाया था। स्वच्छता रिपोर्ट पर गौर करें, तो साफ होता है कि सर्वेक्षण के दौरान दो घाटों को शामिल किया गया है। दोनों घाटों पर सफाई मिली। खुले में कूड़ा नहीं मिला। कूड़ेदान रखे हुए मिले। दोनों घाटों पर सफाई की पूरी व्यवस्था मिली। घाटों के आसपास गंगा में कहीं भी कूड़ा बहता हुआ नजर नहीं आया।

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