जानिए कब है सावन का पहला सोमवार और क्या है इसका महत्व?

सावन का महीना महादेव और माता पार्वती को समर्पित होता है. इस महीने में कई त्योहार पड़ते हैं, इस कारण पूरा महीना ही एक उत्सवभरा रहता है. सावन के महीने में सोमवार का लोगों को खासतौर पर इंतजार रहता है, क्योंकि सोमवार के दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त उनका व्रत रखते हैं. सोमवार के दिन ही कांवड़िए भगवान का जलाभिषेक करते हैं.

इस साल सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. इस दिन शुभ योग भी बन रहा है. निर्माण हो रहा है. इस दिन चंद्रमा इस दिन मकर राशि में विराजमान रहेगा और आयुष्मान योग बन रहा है. जानिए कब सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है और इसका क्या महत्व है.

पूरे माह में कुल 4 सोमवार
सावन के सोमवार कभी 4 और कभी 5 होते हैं, लेकिन इस बार महीने में कुल 4 सोमवार ही पड़ेंगे. पहला सोमवार का व्रत 26 जुलाई 2021 को पड़ेगा. इसके बाद अगला सोमवार 2 अगस्त, तीसरा सोमवार 9 अगस्त और चौथा सोमवार 16 अगस्त को पड़ेगा.

इसलिए रखा जाता है सावन के सोमवार का व्रत
वैसे तो पूरे सावन के महीने को ही भगवान शिव का महीना माना जाता है, लेकिन सोमवार का दिन खासतौर पर महादेव की आराधना के लिए माना गया है, ऐसे में सावन के महीने में सोमवार का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है. जो लोग पूरे सावन के दौरान महादेव का व्रत नहीं रख पाते, वो लोग सावन के सोमवार का व्रत रखकर उनकी आराधना करते हैं.

ये है मान्यता
सावन के सोमवार के दिन महादेव और माता पार्वती के व्रत को लेकर मान्यता है कि ऐसा करने से कुंवारी लड़कियों को महादेव जैसा आदर्श पति प्राप्त होता है. वहीं शादीशुदा लोगों के जीवन की वैवाहिक परेशानियां दूर होती हैं और जीवन अत्यंत सुखमय हो जाता है. इसके अलावा अकाल मृत्यु और दुर्घटना आदि से मुक्ति मिलती है. साथ ही व्यक्ति निरोगी हो जाता है.

सावन के सोमवार के दिन महादेव की पूजा
सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद महादेव और माता पार्वती के समक्ष व्रत का संकल्प लें. इसके बाद दोनों के साथ वाली प्रतिमा या शिवलिंग को स्थापित कर जलाभिषेक करें. फिर महादेव को चंदन और माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करें और इसी के साथ भगवान को फूल, धतूरा, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित करें. इसके बाद माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की चीजें अर्पित करें. फिर धूप, दीप और प्रसाद आदि चढ़ाएं. भगवान के सामने शांत बैठ कर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. शिव चालीसा पढ़ें और आरती गाएं. फिर भगवान से अपनी भूल चूक को माफ करने के लिए प्रार्थना करें.


खबर इनपुट एजेंसी से

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