शालिग्राम शिला से ही क्यों बनेगी रामलला की मूर्ति, क्या है इसका धार्मिक महत्व?

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की मूर्ति के निर्माण के लिए नेपाल की गंडकी नदी से शालिग्राम शिला को लाया जा रहा है. ये दो शिलाखंड 2 फरवरी को अयोध्या पहुंचेंगे. जानकारों के मुताबिक इन दोनों शालिग्राम शिलाखंडों का वजन 127 क्विंटल है.

ऐसी मान्यता है कि शालिग्राम शिला की पूजा करने से ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है. घर में शांति और समृद्धि आती है. हिंदू धर्म की मान्यता के मुताबिक शालिग्राम शिला से आत्मा की शुद्धि होती है. कई प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा आती है.

अनुष्ठान मेें उपयोग
हिंदू धार्मिक समारोहों और अनुष्ठानों में इसका उपयोग अत्यंत शुभ माना जाता है. हिंदू धर्म की सांस्कृतिक विरासत के तौर पर इसका अपना पौराणिक महत्व है. शालिग्राम शिला का सौंदर्य, इसकी आकृति और रंग-रूप प्राकृतिक हैं.

शालिग्राम शिला के महत्व का उल्लेख हिंदू धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है. जहां इसकी उत्पत्ति और पूजा के लाभों का भी वर्णन हैं. पुराणों में शालिग्राम शिला से आध्यात्मिक लाभ का भी वर्णन किया गया है. ऐसा माना जाता है यह भक्तों को आध्यात्मिक चेतना की श्रेष्ठता तक पहुंचने में मदद करता है.

नकारात्मकता दूर होती है
ऐसा माना जाता है शालिग्राम शिला से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. पुराणों में बताया गया है कि इससे आंतरिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक विकास होता है. इसके धारण करने से शारीरिक व्याधियां के दूर होने की बात भी कही गई है.

शालिग्राम शिला हिंदू धर्म में शादियों के लिए एक पवित्र और शुभ वस्तु मानी जाती है. अक्सर विवाह समारोह में नव-विवाहितों के आशीर्वाद लेने के लिए इसका उपयोग किया जाता है.

त्योहारों में उपयोग
शालिग्राम शिला की दिवाली और नवरात्रि जैसे हिंदू धार्मिक त्योहारों के दौरान भी पूजा की जाती है. इसकी जहां स्थापना की जाती है वहां उसे एक पवित्र और तीर्थ स्थल की मान्यता मिलती है. शालिग्राम शिला का प्राकृतिक रंग आमतौर पर काला होता है, लेकिन यह भूरे से लाल रंग में भी पाया जाता है.

प्राकृतिक उत्पत्ति
शालिग्राम शिला Ammonite श्रेणी का स्टोन है जो अपने विशेष आकर्षण और भिन्न किस्म की आकृति के लिए विख्यात है. इसके कुल 33 प्रकार बताए गये हैं. इसकी उत्पत्ति करोड़ों वर्ष पूर्व की बताई जाती है. इसका विकास प्राकृतिक रूप से होता है. इसका निर्माण नहीं किया जाता. इसका जन्म भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से होता है. इसीलिए इसे प्रकृति की एक अनूठी रचना माना जाता है.

अपनी इसी प्राकृतिक दुर्लभता के चलते शालिग्राम शिला की सुंदरता विश्वविख्यात है और यह मूल्यवान भी. हिंदू धर्म में भक्तों और संग्रहकर्ताओं में इसकी खासी मांग रहती है.

 

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