प्रभु जी ने मुझे आँचल थोड़ा बड़ा दे दिया. मुझ फूहड़ से यह संभलता नहीं. कितना भी बचूं कहीं न कहीं उलझ ही जाता है. अब इतना उलझेगा तो धागे…