प्रेमचंद की कहानी ‘सवा सेर गेहूं का मंचन, रो उठे दर्शक

-प्रेमचंद की कहानी ‘सवा सेर गेहूं का मंचन, रो उठे दर्शक- जहां कोरोना के चलते नाट्य प्रस्तुतियां स्वप्न हो गई थी वही इस नाटक की प्रस्तुति से नाटक जगत में…

मौन : मौन मुखर प्रश्न मेरे उत्तर विमुख हुए जाते हैं स्याह सी रात के साए आ उन्हें सुलाते हैं

-मौन- मौन मुखर प्रश्न मेरे उत्तर विमुख हुए जाते हैं स्याह सी रात के साए आ उन्हें सुलाते हैं नदिया चुप सी बहती है चांदनी मौन में निखरती है अंतर्मन…

“बेटी” कोख कहती मेरी मैंने तो संतान जने हैं बेटा बेटी कहकर तुमने ये कैसे ताने बुने हैं

बेटी कोख कहती मेरी मैंने तो संतान जने हैं बेटा बेटी कहकर तुमने ये कैसे ताने बुने हैं सींचा है रक्त से दोनों को ही मैंने नौ मास रात दिन…