MP में बीजेपी ने नई कैबिनेट से साधा लोकसभा का गणित!

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जातिगत जनगणना का दांव चला था जो फेल रहा. लोकसभा चुनाव करीब है और उससे पहले विपक्ष के इस दांव को काउंटर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ओबीसी सीएम के साथ सामान्य और एससी डिप्टी सीएम की जिस सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया था, अब मंत्रिमंडल के गठन में भी उसका विस्तार दिख रहा है. नई सरकार को 28 नए मंत्री मिले हैं.

मध्य प्रदेश में जिन 28 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली है, उनमें 18 कैबिनेट, छह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और चार राज्यमंत्री शामिल हैं. नए मंत्रियों में ओबीसी का दबदबा है. 28 में से 12 मंत्री ओबीसी वर्ग से बनाए गए हैं. सामान्य वर्ग से सात और अनुसूचित जाति से पांच मंत्री बनाए गए हैं. नई सरकार के नए मंत्रिमंडल में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग से भी चार मंत्री बनाए गए हैं. एमपी सरकार के मंत्रिमंडल में जातीय गणित के साथ ही क्षेत्रीय समीकरण, गुटीय संतुलन साधने की कवायद भी साफ नजर आ रही है.

बीजेपी ने साधा गुटीय संतुलन

मोहन के मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे के नेताओं को भी जगह दी गई है तो वहीं शिवराज के करीबियों को भी शामिल किया गया है. हालांकि शिवराज सरकार में मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, विसाहू लाल सिंह, मीणा सिंह, उषा ठाकुर, बृजेंद्र सिंह यादव, बृजेंद्र प्रताप सिंह और हरदीप सिंह डंग को नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है. इस बार ऐसे नेताओं के नाम भी मंत्रिमंडल में हैं जो इन दोनों में से किसी के गुट से नहीं हैं यानी या तो सीएम मोहन यादव ने नाम बढ़ाया होगा या फिर सीधे हाईकमान ने.

मोहन मंत्रिमंडल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी प्रद्युम्न सिंह तोमर, तुलसी सिलावट और ऐदल सिंह कंसाना जैसे नेता नए मंत्रिमंडल में जगह बनाने में सफल रहे हैं तो शिवराज के करीबी माने जाने वाले विश्वास सारंग जैसे नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. सिंधिया समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर ग्वालियर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. वह 2008 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. 2013 में उन्हें मात मिली थी लेकिन 2018 और पार्टी बदलने के बाद 2020 के उपचुनाव में भी वह इसी सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे थे. प्रद्युम्न सिंह तोमर और तुलसी सिलावट, शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में भी मंत्री रहे थे.

नए चेहरों, अनुभव का संतुलन

नए मंत्रिमंडल में नए और पुराने चेहरों के बीच संतुलन साधने की कवायद भी साफ नजर आ रही है. मोहन मंत्रिमंडल में विश्वास सारंग, प्रद्युम्न सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गजों को शामिल किया गया है तो वहीं कृष्णा गौर और ऐदल सिंह कंसाना समेत 17 नेता ऐसे भी हैं जो पहली बार मंत्री बने हैं. मोहन मंत्रिमंडल में अनुभवी और नए चेहरों के बीच संतुलन साधने की रणनीति भी साफ झलक रही है.

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