बार बालाओं के ठुमके पर बेकाबू हुआ पुलिस का जवान, स्टेज पर नोट उड़ाने के बाद लहराया SLR

औरंगाबाद : बिहार के मुंगेर में छठ पूजा के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम हथियार प्रदर्शन का मंच साबित हुआ। स्टेज पर बार बालाओं के साथ पुलिस का एक जवान डांस करने लगा। उसके बाद वर्दी में एसएलआर लेकर मंच पर चढ़ गया। वहां पहुंचने के बाद लोगों के उकसावे पर हथियार निकाल लिया और उसे आसमान की तरफ तान दिया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। उसके बाद एक और आदमी स्टेज पर चढ़ता है और पुलिस जवान को एसएलआर का प्रयोग करने और उसे निकालने से रोकता है।

हथियार के साथ डांस

पुलिस का जवान एसएलआर से फायरिंग करने की कोशिश करता है। ये कार्यक्रम छठ पूजा समिति की ओर से आयोजित किया गया था। हालांकि, धार्मिक कार्यक्रमों में बार बालाओं के डांस पर रोक है, लेकिन फिर भी ऐसा हो रहा है। मामला मुंगेर जिला अंतर्गत बरियारपुर थाना क्षेत्र के खड़िया गांव का है। खड़िया गांव में छठ पूजा के अवसर पर 31 अक्टूबर की रात कमेटी के सदस्यों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान भक्ति जागरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मगर देर रात होते ही मंच पर बार बालाओं को डांस के लिए बुला लिया गया।

मामले की होगी जांच

इस दौरान मंच के समीप सुरक्षा में लगे बिहार पुलिस के जवान जो कि बरियारपुर थाना के पुलिस जवान हैं। आर्केस्ट्रा के दौरान ड्यूटी पर तैनात जवान ने पैसे लुटाए और एसएलआर लेकर स्टेज पर चढ़ गया। तभी मंच पर मौजूद स्थानीय लोगों ने पुलिस जवान को पकड़कर उसके राइफल को अपने हाथ में लिया। पुलिस जवान को किसी तरह मंच से उतारा गया। अब वीडियो वायरल होने के बाद मुंगेर पुलिस कोई जवाब नहीं दे रही है। इस मामले में बरियारपुर थानाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार ने बताया कि ये वीडियो खड़िया गांव का है और नाचने वाला जवान थाना का ही है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी।

मुखिया का जबरा डांस

औरंगाबाद के हसपुरा प्रखंड के जैतपुर पंचायत के महुआड़ गांव में पंचायत के सत्येन्द्र मुखिया का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की पुष्टि एनबीटी नहीं करता है। लेकिन वीडियो में मुखिया नजर आ रहे हैं, जो बार बाला के साथ अश्लील हरकत करने के साथ स्टेज पर डांस कर रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि बिहार सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिनके कंधों पर अश्लीलता जैसी सामाजिक विकृतियों को फैलने से रोकने की जिम्मेवारी है। वहीं अश्लीलता फैला रहे हैं।

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